आपकी सोच ही आपकी स्थिति का कारण हैं your 
thinking is the reason for your situation
अगर मैं कहूँ , “आप अमीर बन सकते हैं | ”  तो ज्यादातर लोंग इस बात पर यकिन ही नही करेगें | क्योकि उन्हें पता हैं कि पैसा कमाना बहुत मुश्किल हैं | जबकि सच तो यह हैं कि पैसा कमाना बहुत आसान हैं | 
अब आप सोंच रहें होगें कि पैसा कमाना इतना ही आसान होता तो दुनियॉ मैं कोई दु:खी ही नहीं होता | और सभी लोग आराम से पैसा कमा रहें होते |


मैं आपकों कुछ कारण बता रहा हूँ , जिनसें आप जान सकेगें कि आप कैसा और कितना सोच पा रहें हैं ?


1 – लोग दु:खी आज पैसों से नही है बल्कि वो दु:खी अच्छीं सोच न हो पाने की वजह से हैं | उन्हे बचपन से यही सिखाया गया हैं ” कि पैसा कमाना बहुत मुश्किल हैं |”


2 – अमीर लोग चीजों को बेचनें के रास्ते खोजतें हैं जबकि गरीब उन्हें खरीदनें के लिए पैसे जुटाते हैं | यह सोच का ही नतीजा हैं जो हमें अलग बनाता हैं |


3 – यह किसी की सोच  ही हैं जिसने लोगों के घरो में  रखे सुरक्षित धन को बाजार में बैंक खोलकर उसमें धन जमा कराने के लिए आकर्षित किया |


4 – आप बैंक में खाता खोलते हैं , बीमा पॉलसी लेते हैं ताकि कुछ पैसे बचाँए जा सकें | और वो उसी पैसे का इस्तेमाल marketing business में करते हैं |


5 – गरीब सारी ज़िदंगी बैकों को भरने में लगें रहते हैं |
और अमीर बैकों से धन निकलने के फण्डे अपनाते हैं |


6 – अमीर इसलिए और अमीर होता चला जाता हैं क्योकि वो सम्पती ( assets ) बनाता हैं | जो उसके जेब में पैसे ड़ालती हैं |
जैसें :- बाँड्स, रियल – स्टेट , प्रोपर्टी , शेयर आदि चीजों  में invest करता हैं |


जबकि गरीब दायित्व (liabilities) बनाता हैं | जो उसकी जेब से पैसे लेती हैं |
जैसें :- गाड़ी , मकान, मोबाइल , कपड़े , गहनें, आदि सारी चीजें सिर्फ दायित्व ( liabilities ) हैं जो उससे पैसे लेकर अमीर होने का अहसास कराते हैं ना कि उसे अमीर बनाते हैं | “
                                   
नोट – यह राँबर्ट कियोसाकि की किताब ‘Rich Dad and poor Dad ‘ से प्रेरित हैं |


7 – आपकी गरीबी आपके ‘ सपने और सोच ‘ पर ताला नहीं लगा सकती | आप कितना भी बड़ा सोच सकते हो | आप खुली आँखो से सपने भी बड़े देख सकते हो |
      
8 – आज हमारें पास जो कुछ भी हैं या हम जिस भी स्थिति में हैं वो पचास साल पहले ये चीजें उपलब्ध नहीं होगीं | फिर भी उस समय के लोग आज की स्थिति की demand कर रहें होगें | और आज जब हमें वो सारी चीजें उपलब्ध हैं तो हम फिर से खुद को असाह महसूस कर रहें हैं |          
9 – हमारी problem ही यहीं हैं कि हम वर्तमान में जीना पसंद नहीं करते बल्कि हम भविष्य और भूत को लेकर चितिंत रहते हैं |


10 – समय की कीमत  को  न पहचान पाना |
आप दिन भर छोटी- मोटी चीजों में पैसा बचाकर समय को खर्च कर देंतें हैं , जिसकी किमत आपके बचाये हुए पैसो से ज्यादा हो सकती हैं |
जैसे :- आप market में सब्जी वाले से कुछ रूपये बचा लेते हैं | आप घण्टों कम्प्यूटर पर बैठकर online shopping में गुजार देतें हैं | कुल मिलाकर आपने पूरे दिन में 50 रूपये बचा लियें तो आपके उन घण्टो की कीमत 50 रूपये ही हैं |


11 – आपकी सोच ही आपकी स्थिति का कारण हैं | यह जिम्मेदारी आपको ही लेनी पड़ेगी | क्योकि आपने खुद को लाचार , बेवस और कमजोर ही आँका हैं | इसमें अब दुसरों का क्या दोष ?


12 – अगर मैं एक शब्द दू ‘बादाम’ तो आपके दिमांक में पहली बात क्या आएँगी ? यही कि ये बहुत महँगा हैं | और शरीर के लिए फायदेंमद हैं | जबकि सही बात तो यह हैं कि इसका मूल्य x रूपये हैं और इसमें calcium , protein , magnesium और iron अधिक मात्रा में पाया जाता हैं जिसें हम अन्य चीजों से भी ले सकतें हैं |


” हमारी सोच हैं कि हम ‘सही समय पर सही लोगों तक’ अपनी ‘समझ और सोच’ को पहुँचा सकें , ताकि आप उसका लाभ ले सकें | अगर आपके जीवन में यदि हम कुछ भी बदलाव ला सकें तो हम खुद को धन्य समझेगें | “


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