दोस्तों , 14 फरवरी का दिन युवाओं के लिए विशेष होता हैं | इस दिन boys & girls अपने प्यार का इज़हार करते हैं | एक दुसरें को अच्छे – अच्छे गिफ्ट देतें हैं | पूरी दुनियॉ के लिए प्यार भरा दिन ( Love day ) होता हैं |
मैनें सोचा क्यों न इस पर थोड़ा छान – बीन की जाएं और पता लगाया जाएं कि आखिर इसी दिन को इतना महत्व क्यों दिया जाता है ? क्यों सभी की प्यार की फसल इसी दिन को पकतीं हैं ? क्यों सातो सागरों में प्यास दौड़ पड़ती हैं ?क्यों बिना बारिश के मेढ़क सुरीली आवाज में टरटराने लगते हैं ? क्या वेलेंटाइन डे के बिना प्यार पंगु (लगड़ा ) हो जाएँगा ?





# आखिर क्यों मनातें हैं ‘वेलेंटाइन ड़े ‘?


        तीसरी सदी में रोम ( इटली )का राजा ‘ क्लाँडियस ‘ का मानना था कि जिसका विवाह ( शादी ) हो जाती हैं | उसका दिमाक तथा सोचने समझने की शक्ति खत्म हो जाती हैं | इसलिए उसने अपने राज्य में यह घोषणा करवा दी | कोई भी मनुष्य शादी नहीं करेगा और यहीं आदेश उसकें सैनिको और अधिकारियों के लिए भी था | जब यह बात वहा के कट्टर ईसाई ‘सेंट वेलेंटाइन ‘ को मालूम चली तो उन्होनें इसका कड़ा विरोध किया | उन्होनें कई सैनिक और अधिकारियों के विवाह सम्पन्न करायें |
जब ‘ क्लॉडियस ‘ ने अपना विरोध देखा तो उसने अपने आदेश की अवहेलना करने के जुर्म में फाँसी की सज़ा का हुक्म दें दिया | और ‘सेंट वेलेंटाइन’ को 14 फरवरी सन् 269 को फाँसी दें दीं गई |
तभी से वेलेंटाइन लोगों के दिलों में प्यार को इज़हार करने का ज़रिया बन गया |
        हमारे देश में भी संत हैं , जैन मुनी श्री विमल सागर जी महाराज | वो कहतें हैं , ” इटली के ‘सेंट वेलेटाइन’ खत्म हुए तो वहाँ के लोग उनकी याद में  वेलेनटाइन डे मनाते हैं | मगर आपका कौन खत्म हुआ हैं ? जो मनायें जा रहें हो वेलेंटाइन डे | आप अपनी शादी की साल गिरह मना लो |”
       
        अगर आप प्यार कर रहें हैं ? ठीक हैं ,  अच्छी बात हैं | परन्तु मेरा मानना हैं कि 365 दिनो का प्यार किसी एक दिन पर ही नही उड़ेल देना चाहिए |
यह तो प्रत्येक दिन और प्रति पल का होना चाहिए |
प्यार किसी एक बंधन का बंधक होकर भी नहीं होना चाहिए | यह पिता – माता, भाई – बहन , चाचा – चाची , दादा – दादी आदि  सभी रिश्तो के लिए बराबर का होना चाहिए | यही तो सिखाते हैं हमारे संस्कार | असली और कामयाब प्यार तो तभी कहलायेगा जब आपके पालन – पोषण करने वाले खुश होगें | यह निर्भर करता हैं आपकी सोच और समझ पर | कि आप अपने प्यार को सभी की सहमती का विस्तार देना चाहतें हैं या खुद स्वार्थपूर्ण तरीके से सकुंचित होकर दर – दर भटकना चाहते हैं |


मेरे एक मित्र ने पूछा , ” बन्धू , प्यार क्या अन्धा होता हैं ?
मैनें कहॉ , ” नहीं दोस्त , प्यार अंधा नही होता बल्कि वो तो दिव्य दृष्टि पा लेता हैं जो आम लोग नहीं देख पाते हैं | वह उसको नज़र आता हैं | और जो आम लोगो को नज़र आता हैं , उसे वह नज़रअदांज करता हैं | “
“प्यार धैर्य की धीमी आँच पर परवान चढ़ता है, तब जाकें विश्वास का स्वाद चखता हैं |”
     
      कई बार लोग इसी बात को लेकर depression में चले जातें हैं कि उनकी girl friend उन्हें छोड़कर चली गई | तब कई लोग इतनी बुरी तरह से टुट जातें हैं जैसे उनकी oxygen supply कट गई हो | मनाते रहो जिदंगी भर गम | तुम्हारे depression से उस पर कोई impression होने वाला नहीं | इसलिए आप अपनें काम से मोहब्बत करों | जब आपकी कामयाबी गगन चूमेगी तो उसे खुद अपने आप पर अफ़सोस होगा | अगर आप फालतू के  argument में उलझें रहेगें तो आप अपना ही समय बर्बाद करोगें | तब आपके पास में न passion होगा और ना ही प्यार होगा | आप से प्यार करने वालो को मैं गिनाने बैठू तो लाइन लग जाएँगी | मगर आप अपनी निगाहें कहीं और जगह पर टिकायें बैठे हैं | आप अपने अदंर  ‘जज्बा’ जगाओं और अहमित दो जो आपको चाहते हैं | अपने कुठित मन की खिड़की से बाहर झाकों , नई दुनियॉ आपके लिए बाँहे फैलाकर इतंज़ार कर रही हैं | अपनी कल्पनाओ के बीज नक्षत्रो में बोओ | तो क्या हुआ असफलता गिराएँगी मगर अपने पीछे एक सबक भी तो छोड़कर जाएँगी | जिसे पकड़कर तुम दौगुने आत्मविश्वास से उठो |
  
       ” जो गिरने से घबराये बैठें हैं |
          वो पैर  वहीं  जमायें बैठें  हैं ||
बचपन में तुमने गिर-गिरकर उठना सीखा हैं | बिना गिरे झरोके से कब खग ने उड़ना सीखा हैं ||
         जो उगली थामकर चलतें हैं |
         वो राहे अपनी कब चुनते हैं ||
आलसी गीदड़ ठड़ी रातो में पछताते हैं |
        तिनका  जोड़ – जोड़  के  हारिल ,
        तब  नीड़  का  सुख  पाते  हैं  ||
तँबा का तम,तप ,त्याग , हमें यह सिखलाता हैं |
गौरी रोटी सेकन को खुद का रूप बिसर जाता हैं ||


‘ वेलेंटाइन डे ‘ पर post डालनें का मेरा मकसद  यह था कि जो लोग भटक चुके हैं या जिनकी गाड़ी गलत track पर जा रही हैं | वो प्यार के मायने समझे |अपनी जिदंगी की अहमियत को समझें और अज्ञानता के अधेरे से निकलकर ज्ञान की रोशनी में आयें | मुझे पूरी उम्मीद हैं उनकी गाड़ी रूकेगी नही तो धीमी तो जरूर होगी |


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