Save Water Tips in Hindi पानी बचाओ पर निबन्ध 

नमस्कार दोस्तों ! स्वागत हैं आपका आपनी बेवसाइट MJC  में. हम आज की पाँस्ट में जल के महत्व व उसके सरंक्षण के बारें में जानेगें.
जैसा हम सभी जानतें हैं कि मनुष्य को जीवन जीने के लिए पानी बहुत ही आवश्यक है मगर यह जानकारी होने के साथ-साथ हमें उसके सरंक्षण की भी चितां होनी चाहिए ।
जब हम Time management के गुण सीख रहें होतें हैं, तब महाराष्ट्र के लातूर जिला तथा उत्तर- प्रदेश के बुन्देलखण्ड़ में पीने के पानी के लिए लोग घण्टों बर्बाद कर रहें होते हैं. ऐसा नहीं हैं कि सब्जी मण्ड़ी गयें पैसे दियें और सामान लियें चल दियें, नहीं बल्कि उन्हें अपनी जान जोखिम में ड़ालकर कई फुट गहरे कुएँ अथवा खाई में उतरना पड़ता हैं.
जहाँ पानी उपलब्ध हैं, वहाँ लोग पानी की कीमत नहीं समझ रहें. अभी कुछ दिन पहले मैं गुजरात के लिए टिकिट बुक करा रहा था. मेरे आगे वाले एक सज्जन बैगलुरू की टिकिट बुक करा रहें थे.
मैने उनसे कहाँ “भाई, बैगलुरू तो काफी हाईटेक सिटी हैं.”
वह बोले ” भाई हाईटेक तो बहुत हैं मगर,,,,,इतना हकहकर वह रूक गये.”
मगर क्या ? ,”मैनें पुन: पूँछा.”
वह सामने वाली दुकान में बिक रही ठण्डे़ की बोतलों को देखते हुए बोले, ” भाई, आप कितना भी ठण्ड़ा पी लो पर असली ठण्ड़क तो पानी से ही प्राप्त होती हैं.”
वह किसी दार्शनिक की तरह बोले इसलिए मुझे उनकी भाषा में बैचेनी महसूस हुई.
मैं जिस होटल में काम करता हूँ. उस होटल के मालिक ने बैज्ञानिकों को बुलाकर जमीन की जाँच कराई, ताकि पानी की सटीक जानकारी के हिसाब से Bore well कराया जा सकें, बहुत खोज-बीन के बाद एक जगह निश्चित हुई और bore कराया गया. जिसमें खर्चा लगभग सात लाख आया जो कि अपने यहाँ 10 – 20 हजार रूपयें आता हैं.
वह Bore कुछ ही दिन चला उसके बाद पानी देना बंद हो गया.
मालिक के सात लाख रूपयें पूरी तरह बर्बाद हो गयें.
तभी मेरी नजर स्वीट की दुकान खोल रहें सेठ पर गयी, जो अपनी दुकान के सामने की जगह को Bore well के पानी से साफ कर रहें थे.
ऐसे न जाने कितने लोग पानी को यू ही बर्बाद कर रहें हैं.
अभी एक और सज्जन अपने गाँव की कहानी सुनाने लगें. यह उनके जीवन का पहला ऐसा साल था जिसमें उनके पूरें गाँव के नलों का पानी पूरी तरह सूख चुका हैं.

हम पानी को किस प्रकार बचा सकते हैं ?

मैनें बचपन से ही पानी का सदुपयोग करना सीखा हैं. आप भी यदि करतें हैं तो बहुत अच्छी बात हैं नहीं तो आप भी यह नियम अपनाकर जल सरंक्षण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकतें हैं. 
ताकि आने वाली पीढ़ियाँ आपके योगदान से अपना जीवन यापन कर पायें. अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब लोग पीने योग्य पानी चाँद पर नहीं, धरती पर खोजेगें.
एक बार हमारे देश के भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्री ‘अटल बिहारी बाजपेयी’ जी ने कहाँ था,” यदि हम जल सरंक्षण के प्रति गम्भीर नहीं हुए तो तृतीय विश्व युद्ध पानी के लिए होगा.”
अगर इसी प्रकार स्थिति बनी रहीं और समय रहते हमने जरूरी कदम नहीं उठायें तो एक दिन जल सकंट का सामना पूरे विश्व को करना पड़ सकता हैं. ऐसी स्थिति में तृतीय विश्व युद्ध होना लाजमी हैं.

जल संसाधन Water resources

वैसे तो पृथ्वी तीनों ओर पानी से घिरी हुई हैं. धरती 1/4 भाग में ही मौजूद हैं बाकि भाग में पानी हैं मगर 97% पानी खारा हैं. 2% पानी ग्लैशियर बर्फ के रूप में मौजूद हैं. बाकि 1% पानी पीने योग्य हैं. जो हमें मुख्यतय तीन प्रकार से प्राप्त होता हैं.
1 – धरातल के ऊपर का जल – यह बर्षा का पानी होता हैं जो जमीन पर आते ही कई प्रकार की अशुद्धियाँ घुल जाती हैं.
2 – धरातलीय  जल – नदी, तालाब, झरने, झील धरातलीय जल के प्रकार हैं.
3 – अंतधरालीय जल – बावड़ी, बोरिग, कच्चें कुए आदि.
जल सरंक्षण के उपाय How to conserve and save water

1 – घरेलू उपाय Save water at house

* बाथरूम में शावर की जगह बाल्टी का इस्तेमाल करें.
* बर्तन धोते समय डायरेक्ट टंकी न चलायें, किसी बर्तन में भरकर धोयें.
* कपड़े वोशिग मशीन में धोते समय कपड़ो की संख्या के हिसाब से पानी भरे, हो सकें तो हफ्तें में कपड़े धोयें.
* टोयलेट में पानी की टंकी खुली न छोड़े. फ्लेश को जरूरत के हिसाब से ही इस्तेमाल करें अथवा एक कम दूसरा ज्यादा वाला टू-इन-वन फ्लेश लगवा लें, जिससे पानी कम से कम इस्तेमाल हो.
* अपनी गाड़ी को डारेक्ट पाइप की जगह बाल्टी में पानी लेकर मग से धोयें.
* पशु यदि घर में हैं तो उन्हें भी बाल्टी में पानी भरकर नहलायें.
* होली के त्यौहार पर पानी की जगह गुलाल की होली खेले.
* RO से निकले अशुद्ध पानी को अपने पार्क की नालियों में डालें, ऐसे ही बेकार में न बहायें.
* घर की छतों से पाइप द्वारा बर्षा के जल को बाटर हार्वेस्टिग तकनीक के जरियें जोडे़ ताकि जमीन के बाटर लेवल को रिचार्ज किया जा सकें.
* जमीन के पानी को जरूरत भर के लिए निकालें, बेकार में पानी नाली में न बाहायें.
* बाटर स्टोर टैंक में फ्लो बाटर अर्लाम लगवायें ताकि टैंक भर जानें पर पानी को बहने से रोका जा सकें.
* AC के पानी को किसी गमले में डालकर पानी बचायें.

2 – घर के बाहर जल सरंक्षण

* कहीं पार्क या सड़क पर कोई टंकी चालू दिखें तो उसे तुरंत बंद करें.
सार्वजनिक शौचालय में शौच या पेशाब करनें के पश्चात अवश्यक पानी खोलकर बंद जरूर कर दें. अधिकतर लोग टंकी खोल तो देते हैं लेकिन बंद नहीं करके जातें. ऐसा करने से हजारों लीटर पानी बर्बाद हो जाता हैं.
* टंकी के रिसाव के लिए जिम्मेदार व्यक्ति या जल विभाग को जरूर सूचित करें, ताकि टंकी की रिपेयरिग हो सकें.
* खेतों में पानी साम या रात को ही लगायें ताकि पानी का वाष्पीकरण कम से कम हो.
* बरसात के जल को तालाब या टैंक बनाकर पानी को जमा करें.
नोट – बरसात के पानी को ऐसी जगह इकट्ठा न होने दें, जिससे मच्छर पैदा हो.
जैसे – पुराने टायर, नारियल के खोले, लोहें के डिब्बें, गढ्ढे इत्यादि में पानी बिल्कुल जमा न होने दें.

3 – वृक्षा रोपण Plantation 

पेड़ होने से पर्यावरण का संतुलन बना रहता हैं. अधिक बर्षा होती हैं. भारत में सबसे ज्यादा बर्षा होने वाला राज्य मेघालय हैं क्योकि वहाँ वृक्षों की संख्या काफी हैं लेकिन इस बर्ष वहाँ भी 41% से कम बारिश हुई हैं क्योकि वहाँ भी धीरे-धीरे वनों की कटाई बढ़ रहीं हैं.
*हमें वनों की कटाई को कम से कम करना होगा. एक वृक्ष कटने पर 100 वृक्षों का रोपण होना चाहिए.
आप यदि कहीं सफर कर रहें हैं तो साथ में किसी पेड़-पौधे के बीज भी रखे और उन्हें रास्तें में फेकतें जायें, उन बीजों को जब अनुकुलित वातावरण मिलेगा तो वह अकुंरित होगें और एक दिन वह पूरे वृक्ष बन जायेगें.
* 2019 में पद्मश्री विजेता कर्नाटक की Saalumarada Thimmakka ने पर्यावरण के लिए अपनी जिदंगी समर्पित कर दी. वह 8000 से ज्यादा पौधे लगा चुकी हैं.

4 – सरकार बनायें ठोस कानून

* सरकार को जल सरंक्षण के लिए ऐसे कानून बनाने चाहिए जिससे लोग भूजल के इस्तेमाल का दुर्पयोग न करें.
* सरकारी हैंड पम्प जिनसे पानी काफी बर्बाद होता हैं.
कई जगह तो सरकारी टंकी लगी हुई हैं जिन पर पानी प्रयोग का कोई कट्रोल नहीं हैं.
* जहाँ बाढ़ हर साल आती हैं उन जगहों पर नहर बनवाकर सूखा प्रभावित क्षेत्रों में देनी चाहिए जिससे दोनों जगह सतुंलन बना रहेगा.
* जहाँ सरकारी छोटे-मोटे डैम टूटे या बेकार पड़े हैं, उनका पुन: जीर्णोद्धार करना चाहिए.

5 – लोगों में जागरूकता

सरकार को लोगों में पानी के प्रति जागरूकता लानी चाहिए. जहाँ पानी आसानी से उपलब्ध हैं, वही सबसे अधिक पानी की बर्बादी हो रहीं हैं अधिक भूजल का दुर्पयोग हो रहा हैं इसलिए भूजल स्तर में लगातार तेजी से गिरावट हो रही हैं. इसके लिए भूजल वितरण प्रबंधन नियमों का पालन करना चाहिए. ऐसा न करने वालों के ऊपर ठोस कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए. गर्मी में पानी की चितां की जाती हैं मगर शर्दी आते ही हम सब कुछ भूल जातें हैं.
अगर आपका पड़ोसी पानी बर्बाद कर रहा हैं तो यह आपकी जिम्मेदारी बनती हैं कि आप उसे समझायें, साधन जरूर उसके हैं मगर संसाधन प्रकृति के हैं और संसाधनों का दुर्पयोग किसी भी गुनाह से कम नहीं हैं.
“जर्मनी में आप किसी भी होटल में खाना नहीं छोड़ सकतें. आपको पूरा खाना खाना पड़ेगा.”
दोस्तों, आपको हमारी पाॅस्ट कैसी लगी, हमें कमेंट करकें जरूर बतायें. 
अगर आपके पास कोई प्रेरणादायक ले या कहानी हैं तो हमारी मेलआई डी Merajazbaamail@gmail.comपर लिख भेजिएं. हमें आपके सुझावों का इतंजार रहेगा. 
धन्यवाद :)
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