दोस्तो ! सर्वप्रथम मैं आप लोगों को merajazbaa.com की तरफ से बधाई देता हूँ साथ ही ईश्वर से कामना करता हूँ कि आपके जीवन में हमेशा खुशियॉ बनी रहें… | 
यह मेरी प्रथम post है इसलिए मेरी कोशिश रहेगी कि मैं हर उस कुठ़ित खासकर युवा वर्ग की समस्या का समाधान अपनी इस पाँस्ट के माध्यम से कर सकू |
   दोस्तों, हमारे जीवन में चीजें इतनी तेजी से बदल रही है जिसका अहसास हम समय रहते नहीं कर पाते जिसका परिणाम असफलता के रूप में हमें भुगतना पड़ता है । 
ऐसे में कई लोग ”बिखर जाते है तो कई निखर जाते है ।”
यह क्यों होता हैं और इससे बचने के क्या तरीके हैं…? मैं आपको डर से होने वाली stress तथा उससे बचने के उपाय भी बताऊगां | आप धीरे-धीरे समझते हुए पूरा पढ़ते जाइयें तभी आपको समझ में आयेगा ।
1 –    जब हम पढ़ रहे होते है :-
आम तौर पर जब हम पढ़ रहे होते हैं तो न तो कोई जिन्दगी का लक्ष्य होता है और ना ही scope… हम पहले से खीची हुई लकीर को follow करके चलते है |
आपने देखा होगा कि ‘घोड़ा गाड़ी’ में घोड़ा की आँखो पर पट्टी बॉध दी जाती है ताकी वह दाये या बाये ना देख सके और दिखाएं जा रहे रास्ते पर दौड़ता रहे…..। 
ठीक वैसे ही हम भी घोड़ा दौड़, दौड़ रहें हैं | हम पर दबाब डाला जाता हैं अच्छे अंको से पास होने का जबकि हम अपना ध्यान कहीं और ही लगाये रहते हैं | ऐसे में न तो मॉ- बाप अपने बच्चों की रूची को जॉच पाते है और न बच्चे समय रहते अपनी felling किसी से share करते है….. । 
ऐसे में exames का नतीजा ज्दातर फेल ही होता हैं | 
अब बच्चो पर result को लेकर और दबाब बड़ जाता है वो अपने मॉ – बाप को अपने result की बात बताकर उन्हे और दु:खी नहीं करना चाहते हैं क्योकि उन्हें पता रहता हैं कि उन पर पहले से ही काफी परेशानियॉ हैं और यह खबर तो उन्हे और तोड़ देगी इसलिए वह सारी गलतियों का कसूरवार खुद को ही मान लेते है |
मुझे याद है जब मेरे बडे़ भाई नौवी क्लास में फेल हुए तो वो घर पर ही नहीं आये | वो फेल हो जाने के भय से रिश्तेदारी में भागकर चले गये क्योकि तब हमारे पिताजी की मार अग्रेजों के काला पानी की सजा की तरह होती थी और घर पर मेरी मॉ का रो-रोकर बुरा हाल था काफी खोजबीन हुई ….तब फोन भी इतने उपलब्ध नहीं थे मगर तीसरे दिन जाकर वो खुद ही वापस आ गये । एेसे में उन्होने कोई गलत कदम नहीं उठाकर ठीक किया |
ऐसी स्थति में बहुत से बच्चे suicide करने के लिए मजबूर हो जाते हैं | मैं उन्हे बताना चाहूगां कि यह उनका आखिरी फैसला नहीं होना चाहिए | क्योकि यह कैसे हो सकता है कि कोई इमारत पर चढ़कर कायरो की तरह अपना जीवन गवा दें । 
आप एक entrepreneur की तरह सोचिए ..वह Investment करने से पहले अच्छे Returne के बारे में पहले सोचता हैं । 
अब आप भी Invest कर रहें ….क्या ? अपना जीवन 😞😞बदले में आपको क्या मिलेगा… ? कुछ भी नही 😀… जबकि आप पहाड़ो पर चढ़कर अपने जीवन को नया आयाम दे सकतें हैं तथा कई और
युवाओं के लिए प्रेणा का स्रोत बन  सकतें हैं  | इससे वह अपना नाम तो कमाएंगा ही साथ में मॉ – बाप तथा देश का नाम भी रोशन करेगा |
        
 2 –   जब हम पढ़ाई छोड़ते है :-

 असली जिदंगी जीने की शुरूआत ही यही से होती हैं ।जैसे हम परीक्षाओं
में किसी न किसी तरह पास हो जाते थे और अगली क्लास में प्रवेश मिल जाता था ,
ठीक वैसे ही असली जिदंगी की परीक्षा में भी अपने जीवन का एक निश्चित
syllabus बनाईये …रोज खुद को up to date रखिये , ज्यादा महत्वाकांक्षी मत बनिएं । क्योकि तब आप अपना पतन कर बैठेगें |

आपने कई लोगो से उनके काम के बारे में पूछॉ होगा और उनका जबाब यही होता था
,” कुछ नही ! आराम से AC में बैठे रहना है , काम तो कुछ है ही नही |”
हमारी सोच भी ठीक वैसी ही हो जाती है ,हम भी ऐसी ही ऐशो आराम  की कम्पनी की
खोज में निकल पड़ते है मगर क्या यह सम्भव है ? हमे जो करना चाहिए वह न
करकर ,जो नही करना चाहिए वह करते है तो असफलता हाथ लगती  है |
जबकि हमें जरूरत है  अपने आस-पास हो रहे बदलावों पर ध्यान देने की , हम इन
रास्तो को तब अपनाते है ….जब हमे धकेला जाता है या फिर हमारी किसी को जरूरत
नही रहती ।तब अपने आप पर प्रकाश डालते है फिर अपनी कमियों को खोजते है | 
आपकी
लाख कमियों के बीच दफन उस एक अच्छाई को बाहर निकालिये जो आपके खुद पर
अविश्वास के कारण वह कमजोर पड़ गयी … जबकि उसमें ताकत हैं आपको सार्थक
सिद्ध करने की |

मुझे उम्मीद है जो अपने आपको पूरी तरह से असफल मान चुके थे । वो अपने जीवन
में एक नई ऊर्जा व positivity को लेकर अपने नये जीवन की शुरूआत करेगें |

मेरे ब्लॉग लिखने का मकसद भी यहीं हैं कि आज युवाओं के पास जॉब की कोई कमी नहीं हैं | बस कमी हैं तो अपने अन्दर छिपे talent को बाहर लाने की…. ना कि नाकामियों को खुद पर हावी होने देने की । 
नाकामी आपके जीवन का आखिरी प्रयोग नही हो सकती इसलिए अपने प्रयासों की प्रयोगशाला में प्रयोग निरन्तर चालू रखियें |

हमें अपने comments के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया अवश्य  दें |

                                                       धन्यवाद !

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3 Comments

    1. शुक्रियां, मेघ आचार्य जी! मुझे अच्छा लगा कि आप हमारी बेवसाइट पर आयें. आप ऐसे ही सहयोग बनायें रखें. आप अपनी प्रतिक्रिया से हमें अनुग्रहित करते रहें. आभार!

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