एक गॉव में ‘कल्पू’ नाम का एक किसान रहता था | उसकी पत्नी तथा दो बच्चे थे | उसके पास पैतृक पचास बीघा जमीन भी थी | एक बहन थी  जिसकी शादी पिता कर गये थे | 
कल्पू के पिता का आस-पास के गॉव में काफी नाम था क्योकि वह गॉव के बड़े-बड़े मसले चुटकियों में हल कर देते थे | उनकी बातों को लोग सुनते थे और मानते भी थे | 
यहॉ तक तो सब कुछ ठीक-ठाक था | चूकि कल्पू के पिता अब थे नहीं इसलिए परिवार की सारी जिम्मेदारी भी कल्पू के कधों पर ही थी |


मगर कल्पू हमेशा भविष्य और भूत की बातों में खोया रहता था |
वह किसी चमत्कार की उम्मीद में रोज मंदिर जाता था और भगवान की प्रतिमा के आगे दोनो हाथ जोड़कर उन्हे प्रकट होने को कहता …….
यह सिलसिला कई दिनों तक चलता रहा…..आखिरकार कल्पू की श्रद्धा और विश्वास को देखकर भगवान प्रकट हो गये और बोले, ” कल्पू , ‘तुमने मेरी काफी सेवा की हैं इसलिए मैं तुम से प्रसन्न हूँ | माँगो, ‘क्या मागना चाहते हों ?”
कल्पू बोला, ‘ प्रभू , मुझे बहुत खुशी हुई कि आपने मुझे दर्शन दिये | मुझे आप ऐसा वरदान दीजिएं कि मैं जब चाहू तब एक दिन पहले अर्थात आने वाले कल को देख सकू और एक दिन बीते हुए दिन को अगले दिन सुन सकू |’
भगवान को कुछ अटपटा सा लगा मगर वो अपने वचन से प्रतिबद्ध थे इसलिए वह तथास्तु कहँ कर अतंर्ध्यान हो गये |
तभी तेज आवाज आती हैं …..तुम्हे मैं दो घण्टे से कहँ रही हूँ , घर मैं कोई सामान नहीं हैं और तुम सुन ही नहीं रहे हो |’
यह आवाज उसकी पत्नी की थी मगर सामने, आगे-पीछे कोई नहीं था | 
कि तभी तेज बारिस शुरू हो जाती हैं | वह जल्दी से घर में बिखरे सामान को कमरे के अदंर समेटने लगता हैं | 
कि तभी अचानक कल्पू को लगता हैं किसी ने उसका हाथ पकड़ लिया हैं और उसे तेज हिलाया जा रहा है | 
यह निश्चित ही उसकी पत्नी थी जो उसके वर्ताव से तंग होकर उसे रोक रही थी | वह देखकर दंग थी कि अभी सोने का वक्त हैं और यह चारपाई उठा रहे हैं तो कहीं पड़ा हुआ सामान उठा रहें हैं | 
कल्पू उठाते-उठाते कहँ भी रहा हैं कि बारिस आ गई सब सामान हटा लो |
चूकि वरदान के प्रभाव से वर्तमान की चीजों को महसूस किया जा सकता था | इसी वजह से एक दिन पीछे की कही हुई बात सुनाई दे रही थी और एक दिन आगे की बारिस दिखाई दे रही थी |
कल्पू एक दिन पहले का देख लेने से बैचेन हो उठता और एक दिन पीछे का सुन कर वह अपनी प्रतिक्रिया बाद में दे पाता | 
एक दिन आगे और एक दिन पीछे दोनो चीजो का वर्तमान में सही ढ़ग से समावेश नहीं हो पा रहा था इसलिए कोई भी नतीजा नहीं निकल रहा था | 
आये दिन उसे नई-नई परेशानियों का  सामना करना पड़ रहा था | जबकि वह पहले काफी खुश था | उसके व्यवहार से उसकी पत्नी तथा बच्चे सब परेशान थे |
वह अब न किसी से मिल पा रहा था ना बात कर पा रहा था | खेती पूरी तरह से ठप्प हो चुकी थी | छोटे से छोटा रोजमर्रा का काम उसे पहाड़ की तरह लगने लगा | 

अतं में उसने फिर से भगवान का आव्हान किया……भगवान फिर प्रकट हुए और बोले, ” अब तुम्हे कौन सा वरदान चाहिए ?”
कल्पू बोला, ” प्रभू मुझे कोई वरदान मत दीजिएं बल्कि जो आपने पहले दिया हैं उसे आप वापस ले लीजिएं | मैं समझ गया हूँ और मुझे पता चल चुका हैं कि इसांन हमेशा अपने वर्तमान रहकर ही खुश रह सकता हैं | वह भूत या भविष्य में जाकर कभी खुश नहीं रह सकता |
भगवान ने तथास्तु कहॉ और गायब हो गये | 
अब कल्पू अपने आप को पूरी तरह से अपने परिवार को सुन और देख पा रहा था | सभी के चहेरे पर लाखो मोतियों के बराबर खुशी थी |

दोस्तो,यह तो कल्पू की कहानी थी मगर क्या  हम भी कल्पू की तरह भूत और भविष्य में नहीं जी रहे हैं | हम में से कितने लोग पूरी तरह से अपने वर्तमान का उपयोग कर पाते हैं | हम हमेशा भविष्य की चितांओ और अतीत की यादों में खोये रहते हैं |
अगर हम केवल और केवल आज पर अपने आप को पूरी तरह से focus कर ले तो भूत और भविष्य तो स्वत: ही ठीक हो जाएगें |
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