Inspirational Story in Hindi | प्रेरक कथा

दोस्तों,  मैं आपको चार दोस्तों की अब तक की सबसे Best कहानी लेकर आया हूँ, इस कहानी को आप अंत तक जरूर पढें.
तो चलियें शुरू करतें हैं :- 
मनकु, बिधावती, बुधियाँ और आत्मा राम दुबे नाम के चार मित्र थे. ये चारो अलगअलग शहरों में रहतें थे. अब ये चारो मिले कैसे ? इससे पहले इनके बारें में संक्षेप में जान लेते हैं. यहाँ मैं बताना चाहूँगा कि आप अपने आपको भी जाचियें कि इन चारो में से आपके विचार तथा आपका स्वभाव किस से मैच होता हैं ? 
मनकू :
मनकू पढ़ने में Average student हैं. इसे नईनई चीजों के बारें में सोचना, पढ़ना, लिखना पसंद हैं. पसंद आने पर उनके बारे में Search करना, फिर search करके अंत में कोई भी ऐसी वजह जिससे लक्ष्य की दिशा भ्रमित हो जायें. मनकू ऐसा हर रोज करता हैं. वह ऐसा करके अपना बहुत सारा समय तो खराब करता ही हैं; साथ ही Frustration का भी शिकार होता हैं. 
अब बात करते हैं :- बिधावती की
बिधावती का दिमाक बहुत तेज हैं. इसे चीजों को पढ़ने तथा उन्हें याद रखने में महारत हासिल हैं. मगर बिधावती को किसी से बात करना पसंद नहीं हैं. वह बहुत कम बात करती हैं इसलिए, उसने अपने दोस्त भी अपनी तरह ही कम बोलने-चालने वाले तथा काम से काम रखने वाले बनायें हैं. 
बात करते हैं :- बुधियाँ की
बुधियाँ का पढ़ने में बिल्कुल मन नहीं लगता. वह बात करने में एक्सपर्ट हैं. वह नयें लोगों में ऐसे घुलमिल जाता हैं, जैसें उसकी जानपहचान बहुत पहले से हो. 
बुधियाँ का Sense of humour बहुत तेज हैं. उसे लोग भी बहुत पसंद करते हैं. 
बुधियाँ को भीड़ का हिस्सा बनना बिल्कुल पसंद नहीं हैं. वह अपने रास्ते खुद बनाता हैं. 
अब जानते हैं :- आत्माराम दुबे को
आत्माराम दुबे, अपने ज्यादातर निर्णय अपनी आत्मा से लेेते हैं. यह चलते समय चीटीं को भी देखकर चलतें हैं, ताकी कहीं उनसे भूल से भी जीव हत्या न हो जायें. ईमानदारी इनके Dna में मौजूद हैं. 
आत्माराम को अपनी कड़ी मेहनत और खुद पर विश्वास उन्हें आगे ले जानें की प्रेरणा देता हैं. आत्माराम को स्वाभिमान से जीना अच्छा लगता हैं. उन्हें मजाक बिल्कुल पसंद नहीं हैं इसलिए, किसी अन्य के मजाक को अन्यथा लेना उन्हें तकलीफ पहुँचाता हैं.
इन चारो में अलगअलग खूबियाँ हैं मगर एक चीज Comman हैं, वो हैं शोसल प्लेट फाँर्म पर सक्रिय रहना. 
इसी की वजह से ये सभी लोग शोसल मीड़ियाँ के जरियें एक-दुसरे से जुड़े. इन्होनें एक-दुसरे का सहयोग लेकर एक Startup की शुरूआत की.
चारों की Mini team Startup को Grown करने में दिनरात लगी हैं.
अब आप सोच रहें होगें कि मैं इनके बारें में क्यों बात कर रहा हूँ ? दरअसल, ये चारों दोस्त हर व्यक्ति के अदंर ही मौजूद हैं, मगर हम इनका इस्तेमाल सहीं Direction में नहीं कर पातें इसलिए, हम फेल पे फेल होते रहतें हैं. 
मनकू हमारा मन हैं, बिधावती हमारी प्राप्त बिधा हैं, बुधियाँ हमारी बुद्धी हैं और आत्माराम दुवे हमारी आत्मा हैं और शोसल प्लेटफाँर्म हमारा शरीर हैं, जिसमें ये चारों विधमान हैं. 
आपने देखा होगा कि जब हमारा दिमाग काम नहीं करता हैं तो मन बहुत सारे विचार दें रहा होता हैं. जब दिमाग से सोचना शुरू करते हैं तो आत्मा जवाब दें जाती हैं अर्थात वह अलग तर्क देती हैं. ऐसा मालूम चलता हैं कि एक इंसान के अंदर चार इंसान मौजूद हो.
हमारे अंदर मौजूद मन, बुद्धी, बिधा, आत्मा सबका अपना स्वतंत्र तंत्र हैं.
जब तक  हम इनको कोई Direction नहीं देते, तब तक हम कुछ भी नहीं कर सकतें.
स्वामी विवेकानंद ने कहाँ हैं :-
“पढ़ने के लिए जरूरी है एकाग्रता, एकाग्रता के लिए जरूरी है ध्यानध्यान से ही हम इन्द्रियों पर संयम रखकर एकाग्रता प्राप्त कर सकते है.”
हमें किसी भी बिषय पर काम करने से पहले अपने चारो दोस्तों को जान लेना बहुत जरूरी हैं. जब तक आप अपने अंदर के दोस्तों पर विजय प्राप्त नहीं कर लेते. तब तक आप किसी भी क्षेत्र में सफल नहीं हो सकतें.
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Image Courtesy : unsplash.com
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